Tuesday, 14 February 2017

शहीद भगत सिंह से जुड़ी एक ग़लत जानकारी फैलाने की कोशिश

👉 शहीद भगत सिंह से जुड़ी एक ग़लत जानकारी फैलाने की कोशिश

🔴 शहीद भगत सिंह से जुड़ी एक ग़लत जानकारी फैलाने की कोशिश की गई कि उन्हें 23 मार्च को नहीं, 14 फरवरी को फांसी दी गई थी. पर हकीकत ये है कि 1929 में असेंबली में बम फेंकने के बाद भगत सिंह को अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था. भगत सिंह से जुड़े इस मामले की तेज गति से सुनवाई के लिए तब के वायसराय लॉर्ड इरविन ने एक प्रीवी काउंसिल का गठन किया था. तब एक भारतीय डिफेंस कमेटी ने प्रीवी काउंसिल के खिलाफ पंजाब में अपील की थी, जिसे जज विस्काउंट डुनेडिन ने ठुकरा दिया था।

🔵 इसके बाद 14 फरवरी 1931 को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मदन मोहन मालवीय लॉर्ड इरविन के सामने एक यदा याचिका डाली, मगर ये याचिका भी स्वीकार नहीं की गई और भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को शाम 7 बजकर 30 मिनट पर लाहौर जेल में फांसी दे दी गई. भगत सिंह के साथ उनके दो साथी राजगुरु और सुखदेव भी थे.

🔴  Freedom fighters Bhagat Singh, Sukhdev Thapar and Shivaram Rajguru were three great sons of India, who breathed their last as 'martyrs'. All three of them were influential revolutionaries, who sacrificed their young lives to make their motherland, free from the shackles of the British rule.

🔵 Bhagat Singh, a Sandhu Jat, became so popular that he had become the symbol of the new awakening among the youths.

🔴  According to facts, Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev were sentenced to death in 'Lahore conspiracy case' and were ordered to be......Read Full Story Please Click
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Thursday, 26 January 2017

आत्म निर्माण की ओर (भाग3)

आत्म निर्माण की ओर (भाग3)

🔵 यदि तुम्हें किसी व्यक्ति का व्यवहार संकीर्ण मालूम पड़े और तुम उसका तिरस्कार करना चाहो तो पहले विचार कर लो- तुममें उसका तिरस्कार करने की प्रेरणा क्यों हो रही है? उसमें जो संकीर्णता और बुराई है, क्या वह हममें नहीं है? यदि हममें भी वही बात है तो पहले स्वयं आत्मशुद्धि की आवश्यकता है तभी दूसरे पर दोष लगाने का अधिकार होगा। जब तक तुममें वही बुराई है तब तक तुम दोनों बराबरी की श्रेणी में हो। यदि तुममें वह संकीर्णता और बुराई नहीं है तो तुम शुद्ध हो परन्तु उसका तिरस्कार करने से तुममें हीनता आ जायगी। उसको शुद्ध करो। फूल मिट्टी में पड़ कर उसे भी सुगंधित कर देता है। उसे मत कहो, “तुम निकृष्ट और नीच हो, दुष्ट बेईमान हो।” वरन् उसे इन शब्दों की कल्पना ही न होने दो। उससे महानता और ईमानदारी की बात करो। 

🔴 “अमुक व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया”, “अमुक बात अब तक नहीं हुई”, “अमुक कार्य हो जाय तब हम दूसरा काम करें”, “ऐसा हो जाता हो हम भी ऐसा करते”, इत्यादि बातें आलसी व्यक्ति किया करते हैं। जो कुछ तुम्हें करना है उसके लिए दूसरी भूमिकाओं पर ठहरने की क्या आवश्यकता?भूतकाल की अपूर्णताओं पर कुढ़ते रहने की अपेक्षा वर्तमान को पूर्ण कर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। भूतकाल की घटना तो  मुर्दा हो गयी, उसकी कब्र खोदकर हड्डियाँ निकालने से क्या लाभ? चेतन तत्व का आविष्कार करो जिससे तुम्हारा और संसार का निर्माण हो। 

🔵 जब तुम किसी व्यक्ति के व्यवहार में संकीर्णता पाओ, किसी से किसी की चुगली सुनो तो उसके अनुसार कोई काम मत कर डालो और न वह बात लोगों में जाहिर करो। इससे तो वह दुर्गुण फैलता है- दुर्गंध की भाँति और सब सुनने देखने वालों के मन को दूषित करता है। इसके बदले उस दुर्गुण को कम करो। दुर्गुण की चर्चा करने से दिन दूना रात चौगुना बढ़ता है। रोग तो औषधि से शान्त होता है, गरम लोहे को ठण्डा लोहा काटता है। आग पानी से बुझती है। क्रोध नम्रता से शान्त होता है। अतः दुर्गुण से दुर्गुण उसी प्रकार बढ़ता है जैसे क्रोधी व्यक्ति से क्रोधपूर्ण बर्ताव करने से और आग में आग डालने के समान होता है। अतएव दुर्गुण की औषधि है सद्गुण। 

🌹 क्रमशः जारी
🌹 अखण्ड ज्योति -अगस्त 1948 पृष्ठ24

http://literature.awgp.org/magazine/AkhandjyotiHindi/1948/August.24

 

 

 

👉 मरम्मत करो !

🔴 एक साधक ने श्री रामकृष्णदेव से पूछा कि : “महाशय, मै इतना प्रभु नाम लेता हूँ, धर्म चर्चा करता हूँ, चिंतन-मनन करता हूँ, फिर भी समय-समय पर मेरे मन में कुभाव क्यों उठते है?”

🔵 श्री रामकृष्णदेव साधक को समझाते हुए बोले:......Read Full Story Please Click
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